Monday, February 23, 2026
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छ.ग’शा.जे.योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय विधि विभाग लीगल एंड क्लीनिक छात्र संघ का चुनाव,निखिल मांडले,अध्यक्ष, प्रिया सोनी,उपाध्यक्ष चुनी गई

रायपुर – छत्तीसगढ़ महाविद्यालय विधि विभाग के लीगल एंड क्लीनिक इकाई में छात्र संघ चुनाव पर्यवेक्षक प्रदीप सार्वा एवम सीनियर छात्र छात्राओं के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। विधि विभाग द्वारा आयोजित छात्र संघ चुनाव में 4 पद अध्यक्ष उपाधाय सचिव सहसचिव के लिए हुए चुनाव में निखिल मांडले,अध्यक्ष प्रिया सोनी,उपाध्यक्ष चुनी गई ,सचिव के पद पर मनीष रात्रे और  सहसचिव के पद पर ट्विंकल जॉन निर्वाचित घोषित किए गए। विजयी  प्रत्याशियों ने छात्र-छात्राओं सहित विधि विभाग के समस्त अध्यापकों का आभार व्यक्त किया है।

निर्वाचित पदाधिकारियोने कहा हमे  जिस विश्वास के साथ चुना गया है, हम नए सोच के साथ कार्य कर उनकी सोच के  अनुरूप कार्य कर  खरा उतरने का प्रयास करेंगे। हम सब साथ मिलकर एक दूसरे के सहयोग से विधि विभाग सहित महाविद्यालय का नाम रोशन करेगे।अंत में निर्वाचित पदाधिकारियो के द्वारा समस्त छात्राओं एवं अध्यापकों के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था भी की गई थी।

एक नजर मे महाविद्यालय
शान से खड़ा छत्तीसगढ़ का पहला महाविद्यालय एडवोकेट जे. योगानंदम ने चंदा इकट्ठा कर 16 जुलाई 1938 को पहले महाविद्यालय की नींव रखी थी ,देश में एक ओर जहां आजादी की लड़ाई के लिए संघर्ष जारी था, वहीं दूसरी ओर उसी वक्त शिक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा की नींव गढ़ी जा रही थी। अनेक संघर्षों और उतार चढ़ाव के बीच अंतत: शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय की नींव तैयार हुई। उसके बाद से महाविद्यालय 86 सालों से शान के साथ खड़ा है।यह एक ऐसा महाविद्यालय है जहां की फीस काफी कम है।शायद यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के ज्यादातर विद्यार्थी यहां पढ़ाई करने को प्राथमिकता देते हैं। इतिहासकारों की मानें, तो अंग्रेजी हुकुमत के दौरान  उच्च शिक्षा हासिल करना काफी मुश्किल था। उस दौर में महाविद्यालय की स्थापना किसी युद्ध जीतने से कम नहीं थी।ऐसे में एडवोकेट जे. योगानंदम ने महाविद्यालय की स्थापना के लिए एक समिति बनाई, जिसका नाम छत्तीसगढ़ शिक्षण समिति रखा गया।इसी समिति की बदौलत 16जुलाई 1938 को महाविद्यालय का निर्माण किया गया।पहले यह महाविद्यालय बांस की टट्टों से पुराना हेडक्वार्टर के पास संचालित होता था,लेकिन नवंबर 1957 में देश के प्रथम उपराष्ट्रपति डा.राधाकृष्णन ने महाविद्यालय का उद्धाटन किया था।

तीन हजार से अधिक विद्यार्थी करते हैं विद्या अध्यन

महाविद्यालय के प्राचार्य डा.अमिताभ बैनर्जी ने कृष्णा मेश्राम को बताया कि क्षेत्र का सबसे पुराना महाविद्यालय है। यहां तीन हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। इनमें ज्यादातर विद्यार्थी ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। इस महाविद्यालय में एससी, एसटी के विद्यार्थी बड़ी संख्या में अध्ययन कर रहे हैं। शासकीय महाविद्यालय होने की वजह से यहां की फीस काफी कम है।

–इन विषयों की होती है नियमित पढ़ाई

महाविद्यालय में आर्ट, साइंस, कार्मस, पीजीडीसीए और ला विषयों के पाठ्यक्रम संचालित है। वहीं चार विषयों में शोध केंद्र और 18 विषयों में पीजी पाठ्यक्रम संचालित है। इसके साथ ही महाविद्यालय में कुछ ऐसे भी विषय हैं, जिनकी पढ़ाई दूसरे महाविद्यालय में न के बराबर होती है।

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