Tuesday, March 3, 2026
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छत्तीसगढ़ में भी स्लीपर कोच के रेल यात्रियों को मिलेगा बेडरोल, रायपुर रेल मंडल सर्वे के काम में जुटा

रायपुर: ट्रेन के एसी कोच में रेल यात्रियों को बेडरोल दिया जाता है, जिससे यात्रियों को अपने साथ चादर, कंबल या तकिया नहीं ले जाना पड़ता. अब ये सुविधा जल्द ही स्लीपर कोच के यात्रियों को भी मिलने लगेगी. चेन्नई मॉडल की तर्ज पर रायपुर रेल मंडल में भी ट्रेन के स्लीपर कोच में अगले डेढ़ से 2 महीने में बेडरोल की सुविधा रेल यात्रियों को मिलने लगेगी. शुरुआती तौर पर कुछ स्पेशल ट्रेन के स्लीपर कोच में बेडरोल की सुविधा शुरू की जा रही है.

स्लीपर कोच में बेडरोल मिलने को लेकर ईटीवी भारत ने कुछ यात्रियों से बात की. यात्रियों ने बताया कि यह काफी अच्छा रहेगा और इससे रेल यात्रियों को एक्स्ट्रा लगेज नहीं ले जाना पड़ेगा. सामान का बोझ भी कम होगा.

रेलयात्री धीरज ने बताया कि स्लीपर कोच में बेडरोल मिलने से सबसे पहले रेल यात्रियों को यह राहत मिलेगी कि घर से चादर या कंबल लाना नहीं पड़ेगा. यात्रियों के लिए यह बड़ी राहत है, लेकिन इसके लिए रेलवे को इस बात का ध्यान रखना होगा कि एसी कोच में बेडरोल जैसे चीजों की चोरी होती है. ऐसे में स्लीपर कोच में बेडरोल की चोरी होने की संभावना भी बढ़ जाती है.”

रेलयात्री फैजान मोमिन ने बताया “अब तक एसी कोच में तकिया चादर या फिर कंबल मिलता था. यही चीज अगर स्लीपर में मिलता है तो यात्रियों को इससे बड़ी राहत मिलेगी. लोगों को अपने घर से एक्स्ट्रा लगेज लाने की जरूरत नहीं होगी. इससे सामान का वजन भी कम हो जाएगा. कई बार परिवार में बहुत सारे लोग होते हैं जिसकी वजह से ज्यादा लगेज ले जाना पड़ता है जो काफी मुश्किल होता है. “

रेलयात्री साक्षी चक्रवर्ती ने बताया “स्लीपर में बेडरोल की सुविधा उपलब्ध होने से रेल यात्रियों को काफी राहत मिलेगी. लोग आसानी से यात्रा कर सकेंगे. एक नुकसान यह भी है कि चोरी होने का डर बना रहेगा. ऐसे में रेलवे को इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा. अच्छी सुविधा होने के साथ ही रेलवे के लिए यह नुकसान भी हो सकता है.”

स्लीपर कोच में बैडरोल को लेकर रायपुर रेल मंडल सर्वे कर रहा है. रेलवे के सर्वे के बाद यह निर्णय लिया जाएगा कि बेड रोल की नॉमिनल प्राइस स्लीपर कोच में क्या होगी. इसे किस तरह से यात्रियों को दी जाएगी.

रायपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम अवधेश कुमार त्रिवेदी ने बताया “खासतौर पर ठंड के दिनों में रेलयात्रियों को ब्लैंकेट या चादर लेकर चलना एक बहुत बड़ा बर्डन होता है, तो हमारी यह सोच है कि इस तरह की सुविधा हम रेल यात्रियों को दें. मिनिमम चार्जेस पर रेल यात्रियों को इससे राहत मिलेगी. कम सामान के साथ रेल यात्री आसानी से ट्रेवल कर पाएंगे.”

सीनियर डीसीएम अवधेश कुमार त्रिवेदी ने आगे बताया कि इस पर चर्चा चल रही है. इसे यात्रियों के टिकट में काउंट ना करके अलग से नॉमिनल चार्ज जोड़ा जाए, इसके लिए कांट्रेक्टर को इंवॉल्व किया जाएगा और एक निश्चित दर पर लोगों को सुविधा मुहैया कराने का प्रयास रेलवे के द्वारा किया जा रहा है.

अगले 2 महीने में स्लीपर कोच में मिलेगा बेडरोल

रेलवे अधिकारी ने आगे बताया कि इसकी शुरुआत ऐसे ट्रेनों से होगी, जो रायपुर या दुर्ग से बनती है. ऐसे ट्रेन का सर्वे किया जा रहा है. सर्वे के आधार पर जो भी रिपोर्ट आएगी उसके बाद यह सुविधा शुरू की जाएगी. गरीब रथ ट्रेन में यह सुविधा पहले से दी गई है और यह चार्जेबल है. चेन्नई डिवीजन में इस तरह की शुरुआत की गई है उसी के आधार पर रायपुर रेल मंडल में भी इस पर प्रयास किया जाएगा. स्लीपर कोच में बेड रोल लाने की सुविधा आने वाले डेढ़ 2 महीने में शुरू की जा सकती है.

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