रायपुर। खाद्य संचालनालय के द्वारा 2020 से 2022 के समय के केंद्र से मिले कोटा, उसके वितरण और बचत की जानकारी न देने की पोल आखिर खुद विभाग की जांच में खुल गई है। फिलहाल पहली जानकारी में छह राशन दुकानों द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के 2972.60 क्विंटल चांवल,18.82 क्विंटल शक्कर और 32.22 क्विंटल नमक की प्रमाणित कालाबाजारी की गई है। ये जानकारी खुद खाद्य विभाग ने जारी किया है।
हमर संगवारी के अध्यक्ष राकेश चौबे ने बताया कि उनके द्वारा राशन घोटाले की प्रमाणिकता के लिए खाद्य संचालनालय से सूचना के अधिकार अंतर्गत 2020 जनवरी से दिसंबर 2022 की अवधि में केंद्र सरकार से दिए गए चांवल शक्कर के कोटे के आबंटन वितरण और बचत की जानकारी मांगी गई थी। उन्हे संचालनालय में जानकारी नहीं होने की जानकारी दे कर घोटाले को दबाने का प्रयास किया गया है।
श्री चौबे ने बताया कि राजधानी के दो राशन दुकान जयहिंद प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भंडार रायपुर और ग्राम पंचायत मांठ (तिल्दा) को 1728 और 397 क्विंटल आखिर खाद्य संचालनालय के द्वारा स्टॉक होने पर क्यों दिया गया? ये जांच का विषय है। इसी प्रकार जय हिन्द प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भंडार रायपुर के द्वारा 8.38 क्विंटल शक्कर की भी कालाबाजारी की गई है। जब राजधानी की सिर्फ 6 रद्द राशन दुकान द्वारा साढ़े छ: करोड़ रुपए का राशन काला बाजार में खपा दिया गया है तो प्रदेश के अन्य जिलों में कितनी कालाबाजारी हुई होगी सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं। ये केंद्र से भेजे गए कोटे की सब्सिडी का घोटाला है। इसमें केवल राशन दुकानदार ही नहीं राशन दुकानों में स्टॉक बचे होने के बाद भी कोटा जारी करने वाले खाद्य संचालनालय के अधिकारियों के खिलाफ भी एफ आई आर किया जाना चाहिए।
ज्ञात रहे 219करोड़ रूपए के राशन बचत और सब्सिडी घोटाले की जांच विधान सभा समिति द्वारा की जा रही है। चौबे ने बताया कि इस घोटाले की न्यायिक जांच के लिए उच्च न्यायालय में जनहित याचिका लगायी जायेगी, क्योकि खाद्य संचालनालय के अधिकारी माड्यूल और पोर्टल में आंकड़ों से छेड़ छाड़ कर घोटाले को दबाने में लगे है। बाजार से चांवल खरीद कर रखवाने वाले अधिकारी को तत्काल गिरफ्तार किए जाने की मांग की गई है।

