छत्तीसगढ़

बेमेतरा ब्लास्ट में किसे बचा रही सरकार:पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सत्ता पक्ष से किए 5 सवाल, कहा- अब तक FIR क्यों नहीं

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के पिरदा गांव स्थित स्पेशल ब्लास्ट लिमिटेड फैक्ट्री में हुए धमाके को लेकर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया साइट x पर पोस्ट कर लिखा है कि बेमेतरा ब्लास्ट, किसकी गारंटी और किसके सुशासन में गुनहगारों को संरक्षण दिया जा रहा है। सत्ता के किस करीबी को बचाने का प्रयास? जवाब तो देना होगा।

बता दें ब्लास्ट को 2 दिन से ज्यादा बीत चुके हैं, इसके बावजूद अब तक लापता लोगों की संख्या स्पष्ट नहीं है। इसे लेकर ही भूपेश बघेल ने बीजेपी सरकार से 5 सवालों का जवाब मांगा है। प्रशासन केवल 8 मजदूरों के लापता होने की बात कह रहा है। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि संख्या इससे कहीं ज्यादा है।

भूपेश ने किए सरकार से ये 5 सवाल

  1. 48 घंटे बाद भी घटना की अब तक FIR क्यों नहीं?
  2. क्या प्रशासन ने फैक्ट्री प्रबंधन से पूछा है कि घटना वाले दिन कितने मजदूर वहां काम पर गए थे?
  3. अब तक कितने मजदूर लापता हैं क्योंकि प्रशासन के 8 लोगों के दावे को तो ग्रामीण नकार रहे हैं।
  4. क्षमता से अधिक रखी विस्फोटक सामग्री को क्यों निकाला जा रहा है? जांच में विस्फोटक सामग्री की क्या मात्रा दर्ज की जाएगी?
  5. प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को जो मुआवज़ा देने की घोषणा की है उसे तो लेने से ग्रामीणों ने इनकार कर दिया है। क्या प्रशासन मुआवजा बढ़ाएगा?
  6. अब तक FIR क्यों नहीं

    इस दिल दहलाने वाली घटना में मृतकों के शरीर के चिथड़े उड़ गए हैं। शरीर के अंगों को पॉलीथिन में जमा करके DNA जांच के लिए भेजा गया है लेकिन इतने भयावह हादसे के बाद अब तक FIR दर्ज नहीं हुई है। सवालों के जवाब तो देने होंगे।

    हादसे के बाद घटनास्थल पहुंचे डिप्टी सीएम अरुण साव ने विभागीय अधिकारियों को मामले में दंडाधिकारी जांच कराने की बात कही थी और अधिकारी इस जांच के बाद ही किसी भी तरह की FIR दर्ज करने की बात कह रहे हैं। लेकिन दंडाधिकारी जांच के अधिकारी कौन रहेंगे? वे कब तक रिपोर्ट सबमिट करेंगे? इस सवाल का जवाब विभागीय अधिकारियों के पास नहीं है।

    स्पेशल ब्लास्ट लिमिटेड फैक्ट्री के जिस प्लांट में विस्फोट हुआ है। वह प्लांट 4 माह पहले शुरू हुआ था। नाम नहीं छापने की शर्त पर फैक्ट्री में काम करने वाले एक श्रमिक ने बताया, कि इस प्लांट में बारूद की बत्ती (डेटोनेटर में इस्तेमाल करने के लिए) बनाई जाती थी।

    काम करने के दौरान पहनने के लिए केवल ग्लब्स और मास्क दिया जाता था। जब केमिकल टैंकर को खोलने जाते थे, तब ही खुद को कवर के लिए किट और जूते दिए जाते थे। श्रमिकों के अनुसार हर प्लांट पर 1 टन बारूद निर्माण कार्य के दौरान रखना था, लेकिन नियमों का उल्लंघन करके अतिरिक्त बारूद को वहां पर रख दिया जाता था।

    फैक्ट्री ब्लास्ट के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी ग्रामीण वहां धरना दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री से विस्फोटक सामग्री बाहर जा रही है। पहले यहां क्षमता से अधिक विस्फोटक रखा हुआ था जिसे अब जांच से पहले ही दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है।

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