तिल्दा नेवरा सिंधी समाज की महिलाओं के द्वारा गुरुवार को तीजडी का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया गया।पति की दीर्घायु के लिए सुहागानों नेनिर्जला व्रत रखा और तीजडी माता की पूजा अर्चना कर शाम को सामूहिक रूप से कथा सुनी और रात को चंद्रमा को अर्ध्य देकर व्रत का समापन किया।
राखी के तीसरे दिन तिजडी का पर्व सिंधी समाज के द्वारा बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है..परंपरा अनुसार शादी के बाद पहली तीजड़ी सिंधी समाज कि महिलाएं मायके में मानती है..और मायके में रहकर पति की दीर्घायु की कामना करते हुए तिजड़ी का निर्जला का व्रत रखती है।व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाओ ने गुरुवार अलह सुबह 4 बजे उठकर घर में बनाए गए व्यंजन का सेवन कर विधिवत रूप से असुर मनाया..तीजडी कि पूर्व संध्या घर की सभी महिलाओ ने मिलकर परम्परा का निर्वाह करते हुए एक दूसरे के हाथो में मेहंदी भी लगाई । तीजडी पर दोपहर व्रत रखने वाली सुहागीनो सज धजकर तिजडी माता की श्रद्धा के साथ पूजा अर्चना कर उसे झूले में झुलाया,और पति के दीर्घायु कि कामना की। शाम को सामूहिक रूप से तिजोरी माता की कथा का श्रवण किया। रात को चंद्रमा को अर्ध देकर वृत्त का समापन किया।
राखी छठवे दिन सिंधी समाज के द्वारा थधड़ी मनाई जाएगी,इस समाज के घरो में चूल्हा नही जलेगा घर के सभी सदस्य एक दिन पहले बना ठंडा भोजन का सेवन करेंगे..जन्माष्टमी मनाने के बाद मायके आई बहन बेटियां ससुराल लौट जाएंगी। जाते समय मायके से विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर उन्हें विदा किया जाता है। ससुराल पहुंचकर बहन-बेटियां मायके से मिले व्यंजनों को ससुराल पक्ष के रिश्तेदारों के बीच जाकर बाटती हैं|