हीन भावना और नकारात्मक सोच से आती है आत्मविश्वास में कमी – अदिति दीदी

वीसीएन टाइम्स
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00 कृषि महाविद्यालय में कुलपति की प्रेरणा से हुआ ब्रह्माकुमारी बहनों का व्याख्यान
रायपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के शिक्षाविद सेवा प्रभाग द्वारा कृषि महाविद्यालय में व्याख्यान आयोजित कर आत्म विश्वास बढ़ाने की कला विषय पर छात्रों का मार्गदर्शन किया गया। अपने उद्बोधन में राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी ने कहा कि आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए हमें अपने माईण्ड को सेट करने की जरूरत है। कान्फिडेन्स एक लेटिन शब्द है जिसका अर्थ होता है ट्रस्ट अर्थात विश्वास। स्वयं पर भरोसा करना ही आत्मविश्वास कहलाता है। उन्होंने छात्रों से जानना चाहा कि क्या हम खुद पर विश्वास करते हैं? उन्होंने कहा कि आत्म विश्वास को बढ़ाने के लिए सबसे पहले स्वयं की पहचान जरूरी है। आत्मा का ज्ञान होने पर ही आत्मविश्वास में वृद्घि हो सकेगी। दूसरे लोग हमारे में बारे में क्या सोचते हैं यह हमें जानने की जरूरत नहीं है। बल्कि हमें अपनी योग्यताओं और विशेषताओं पर पूरा भरोसा होना चाहिए।
आत्मविश्वास में कमी होने के कारणों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि आत्म विश्वास में कमी तीन कारणों से होती है। पहला कारण है हीन भावना, दूसरा है नकारात्मक सोच और तीसरा कारण है -असफलता के लिए स्वयं को दोषी मानना। मैं ही गलत हूँ, मेरे कारण यह असफलता हाथ लगी है आदि। इस तरह की अपराध भावना से हमें नहीं जीना है। हमें ऐसी नकारात्मक सोच को दूर करना होगा। बीती हुयी बातों को भूल जाएं और कभी भी भविष्य में उस गलती को ना दोहराएं। अगले सत्र में ब्रह्माकुमारी दीक्षा दीदी ने बताया कि सदैव याद रखें कि हम इस दुनिया में युनिक हैं। हमारे जैसा दूसरा और कोई नहीं हो सकता। इसलिए हमारी किसी से तुलना नहीं हो सकती। अपने लक्ष्य पर हमारी स्पष्ट नजर हो। बीती बातों का चिन्तन कर दुखी न हों और न ही भविष्य की चिन्ता करें। आज जो हमारे पास है उसका आनन्द लें। वर्तमान में जीना सीखें। उन्होंने अन्त में सभी को कमेन्ट्री करके राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया।
इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ. जी.के.दास, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय शर्मा, छात्रावास अधीक्षक डॉ. पी.के. सांगोड़े, डॉ. नरेन्द्र अग्रवाल, डॉ. सुनील नाग, डॉ. देव प्रकाश पटेल, डॉ. प्रताप टोप्पो, डॉ. एच.के. सिंग, डॉ. रामकुमार ठाकुर आदि उपस्थित थे।

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