21 प्रत्याशियों की घोषणा कर, 21 पड़ गयी कांग्रेस पर

वीसीएन टाइम्स
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वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी...

पिछले दिनों भाजपा ने छत्तीसगढ़ की 21 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर ये जता दिया कि वो दौड़ के लिये एकदम तत्पर है। इतना ही नहीं उसने अपने प्रत्याशियो को दौड़ाना चालू भी कर दिया है। कार्यकर्ताओं की बैठकें शुरू हो गयी हैं।
आम बोलचाल में कहा जा सकता है कि फिलहाल भाजपा कांग्रेस पर 21 पड़ गयी।

ताल ठोक दी

दंगल में जिस तरह जंघा पर हाथ मारकर पहलवान ललकारते दिखते हैं कुछ वैसा ही संकेत भाजपा ने दिया है अपने सबसे बड़े सियासी दुश्मन के सामने उसके ही परिवार के सदस्य उसके अपने भतीजे को उतारकर। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सामने पाटन विधानसभा सीट से अपने सांसद विजय बघेल को टिकट देकर भाजपा ने ऐसे ही ललकारा है।
विजय को उतारकर भूपेश को घेरने का ये दांव भाजपा का सही सियासी कदम है। हालांकि पहले भी कई बार दोनों के बीच घमासान हो चुका है। इसलिये कांग्रेस शायद ऐसे ही किसी कदम के लिये तैयार भी होगी। इसलिये भाजपा के इस कदम से कांग्रेस को झटका लगा होगा ये कहना अतिशयोक्ति होगी।

जीत का दावा.सिर्फ छलावा

ईधर भाजपा के नेता दावा कर रहे हैं कि इस बार पाटन सीट पर भाजपा का कब्जा होगा यानि विजय बघेल भूपेश बघेल का हरा देंगे। लेकिन ऐसा कोई दावा दूर की कौड़ी कहा जा सकता है। दावा कांग्रेस का भी सही हो सकता है। क्योंकि दोनों ही दिग्गज नेता हैं और इस सीट को दोनों प्रमुख दल सम्मान का प्रश्न बनाएंगे। मुख्यमंत्री रहते भूपेश बघेल यदि चुनाव हार जाए तो बेहद किरकिरी वाली बात होगी तो जाहिर है रूतबेदार मुख्यमंत्री चुनाव जीतने में कोई कमी नहीं करेंगे।
भूपेश बघेल का रूतबा शुरू से ही कायम है। एक तो उन्होंने 2018 के चुनाव में कांग्रेस को 15 साल के वनवास से निकाला और बेहद शानदार जीत दिलाई। इस जीत से उन्होंनें खुद को स्थापित किया। साथ ही पूरे कार्यकाल में कभी विपक्ष से मात खाते नहीं दिखे। हर परिस्थिति में वे अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराते दिखे।
इसमें कोई दो मत नहीं कि हाईकमान की नजर में उनका विशेष स्थान है। एक तो पूरे देश में अपेक्षाकृत कांग्रेस की स्थिति काफी कमजोर है। ऐसे में यहां पर सरकार होना और मजबूत होना और लगातार उन्नति करना ये सब मिलाकर भूपेश बघेल को कांग्रेस संगठन में प्रथम पंक्ति में खड़ा करने के लिये पर्याप्त है।
कुल मिलाकर चुनावी घमासान होने वाले हैं इस बार।

सरकार पर जोर लगाएंगे,या अपनी सीट बचाएंगे

यहां पर एक बात भूपेश बघेल को ये परेशान कर सकती है कि पूरे छत्तीसगढ़ मे वो टाॅप के नेता हैं और उन्हें अकेले ही सब कुछ सम्हालना है। ऐसे में उन्हें हर जगह पहुंचने का प्रयास करना होगा। हर जगह से उनकी डिमाण्ड होगी। ऐसे में वे अपना समय कहां-कहां लगाएंगे ये तय करना उनके लिये कठिन होगा। और फिर नतीजा ये होगा कि वे अपनी सारी उर्जा केवल अपने क्षेत्र में नहीं लगा पाएंगे। इसका भरपूर फायदा भाजपा उठाएगी।
भूपेश के सामने ये धर्मसंकट जरूर पैदा होगा कि वे अपनी सरकार बनाने के लिये संघर्ष  करें या अपनी खुद की सीट बचाने  के लिये…..

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