मानसिक ट्रैफिक को नियंत्रित कर व्यक्ति एकाग्रता और आत्मविश्वास से भरपूर बन सकता है.. प्रियंका बहन

वीसीएन टाइम्स
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ब्रह्माकुमारीज़ तिल्दा में ‘गति, सुरक्षा, आध्यात्मिकता’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में यातायात व परिवहन क्षेत्र के कर्मवीरों का सम्मान

तिल्दा नेवरा -ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय सेवा केंद्र, तिल्दा में  शनिवार को सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने ‘गति, सुरक्षा, आध्यात्मिकता’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा अभियान के तहत आध्यात्मिकता, एकाग्रता और जिम्मेदारी से वाहन चलाने पर जोर दिया गया, ताकि नशे और तनाव जैसी समस्याओं से होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके और एक सुरक्षित समाज बनाया जा सके।इस अवसर पर पुलिस ,रेल विभाग ,परिवहन क्षेत्र से जुड़े कर्मवीरों और आम नागरिको को सम्मानित किया गया..

कार्यक्रम का लक्ष्य समाज में सड़क सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना और सभी को सुरक्षित वाहन चलाने के लिए प्रोत्साहित करना था, जिससे दुर्घटनाएं कम हों। जिसका उद्देश्य तेज़ गति के युग में सुरक्षा और आध्यात्मिक संतुलन के महत्व को रेखांकित करना था।कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ की गई,

ब्रह्माकुमारीज़ के अनुसार, भय, चिंता और क्रोध जैसी भावनाएँ एकाग्रता को प्रभावित करती हैं; आध्यात्मिक अभ्यास मन को शांत करके सुरक्षित ड्राइविंग में मदद करते हैं।प्रियंका बहन ने ‘आत्मा रूपी चालक’ द्वारा शरीर रूपी वाहन के संचालन का सुंदर उदाहरण देते हुए मन में उठने वाले विचारों के ‘ट्रैफिक’ को समझाया। उन्होंने बताया कि राजयोग ध्यान द्वारा इस मानसिक ट्रैफिक को नियंत्रित कर व्यक्ति एकाग्रता और आत्मविश्वास से भरपूर बन सकता है। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ तिल्दा सेवा केंद्र को ‘मन की चार्जिंग स्टेशन’ बताते हुए अल्पकालीन ध्यान का अभ्यास भी कराया, जिसके बाद सभी ने गहरी शांति का अनुभव किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भ्राता सुमन झा ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि गति, सुरक्षा और आध्यात्मिकता तीनों का संतुलन ही आज के व्यस्त जीवन की वास्तविक आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि हम लोग इस जीवन की यात्रा में चलते जा रहे हैं, बस चलते जा रहे हैं .पता नहीं इसका विराम कहां है .लेकिन सच्चाई यह है कि जिंदगी को गति प्रदान करने के लिए आध्यात्म से जुड़ना हम सब की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि इस जीवन में तीन बातों का आपसी संगम है.आध्यात्मिकता, सुरक्षा और गति.. जिंदगी में गति प्रदान करने सबसे पहली जिम्मेदारी है आध्यात्म. अगर हम आध्यात्म से जुड़े या अपने दैनिक जीवन को आध्यात्मिक से जोड़े तभी हम सुरक्षित रह सकते हैं. अगर हम सुरक्षित रहेंगे तभी जीवन को गति मिलेगी. अन्यथा आज की रफ्तार की जिंदगी यूं ही चलती रहेगी. उन्होंने कार्यस्थल के साथ-साथ व्यक्तिगत जीवन में भी इन मूल्यों को अपनाने की अपील की।

आरपीएफ प्रमुख  पतिराम जानी ने ब्रह्माकुमारीज़ संस्था का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आध्यात्मिकता सभी धर्मों का मूल तत्व है, जो व्यक्ति को अपने कर्मों पर ध्यान देकर उन्हें श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा देती है। यदि व्यक्ति अपने कर्मों को शुद्ध कर ले तो वह आध्यात्मिक ऊँचाइयों को छूकर सुखी एवं सफल जीवन जी सकता है।

पीडब्ल्यूआई सीनियर सेक्शन इंजीनियर आर.एन. पटेल ने कहा कि रेलवे में समय के साथ ट्रेनों की गति बढ़ रही है, ऐसे में ट्रैक मेंटेनेंस एवं सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। सटीक, समयबद्ध और दक्ष कार्य की दौड़ में मन तनावग्रस्त हो जाता है, जिसमें आध्यात्मिकता मन को स्थिरता और संतुलन प्रदान करती है। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ तिल्दा के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

अल्ट्राटेक सीमेंट के सीनियर लॉजिस्टिक्स ऑफिसर भ्राता दयाराम यादव ने कहा कि सुरक्षा केवल कार्यस्थल तक सीमित नहीं है, बल्कि घर और समाज में भी उसे अपनाना उतना ही आवश्यक है। आध्यात्मिक जीवनशैली मन को शांत रखती है, जिससे प्रत्येक कार्य में मानवीय त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हो जाती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को ऐसा वृक्ष बनना चाहिए जो जीवन भर छाया दे और जीवन के बाद भी उपयोगी सिद्ध हो।

करीम शुभारभ के पहले मंचासीन अतिथियों मुख्य स्टेशन मास्टर तिल्दा भ्राता सुमन झा, पीडब्ल्यूआई सीनियर सेक्शन इंजीनियर तिल्दा भ्राता आर.एन. पटेल, आरपीएफ प्रमुख पतिराम जानी तथा अल्ट्राटेक सीमेंट बैकुंठ के सीनियर लॉजिस्टिक्स ऑफिसर भ्राता दयाराम यादव का स्वागत किया गया।

कार्यक्रम के अंत में अतिथियों एवं यातायात व परिवहन क्षेत्र से जुड़े कर्मवीरों का सम्मान संस्था की ओर से सौगात प्रदान कर किया गया। सभी वक्ताओं एवं प्रतिभागियों ने सुरक्षित भारत के निर्माण में आध्यात्मिक जीवनशैली के महत्व को स्वीकार करते हुए इसे अपनाने का संकल्प लिया।

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