बलौदाबाजार
-छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के पलारी ब्लॉक के ग्राम सिसदेवरी में एक परिवार की 6 बेटियों ने रूढ़ियों की बेड़ियां तोड़कर एक मिसाल पेश की है.तीजबत्ती साहू का 68 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।तीजबत्ती का कोई बेटा नहीं होने से छह बेटियों ओमन साहू 50 साल समेत सावित्री (45), सुशीला (43), संतोषी (41), दूरपति (38) और तुकेश्वरी (35) साल ने बेटों का फर्ज निभाया। इन बेटियों ने पहले मां की अर्थी को कंधा दिया है. इस अद्भुत दृश्य ने उन परंपराओं को चुनौती दी, जो हमेशा यह मानती रही हैं कि अंतिम संस्कार में केवल बेटे ही हिस्सा ले सकते हैं.
तीजबत्ती साहू के निधन खबर मिलते ही सभी बेटियां तुरंत मायके पहुंच गईं, ऐसे में बेटियों ने पुरानी मान्यताओं को दरकिनार करते हुए मां को कंधा दिया.और अंतिम संस्कार की सारी जिम्मेदारी संभाली। छह बेटियां घर से श्मशान घाट तक मां की अर्थी लेकर पहुंची और हिंदू रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया।और बेटियों ने अपने पिता डोमार साहू को भी संभाला, जो पत्नी के जाने से टूट चुके थे।
यह कदम न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बन गया है, क्योंकि इसने पुरुषप्रधान सोच को चुनौती दी है. मां की मौत होने पर बेटियों ने न केवल खुद को संभाला, बल्कि मृत्यु के बाद सभी रस्मों को निभाया.और समाज की रूढ़ीवादी सोच को खत्म करने का संदेश फैलाया, गांव और आसपास के क्षेत्र को इन बेटियों ने बहुत बड़ा संदेश दिया है. इस दौरान परिवार जन, सगे संबंधी और गांव के लोग मौजूद रहे।.बेटियों की ओर से कंधा देने वाली इस पहल की इलाके में काफी चर्चा हो रही है. इसे महिलाओं के अधिकारों के प्रति सकारात्मक पहल के रूप में देखा गया है.
ग्रामीणों ने भी बेटियों की सराहना करते कहा कि वर्तमान में बेटा व बेटी में कोई फर्क नहीं है और हमें ऐसी रूढ़ीवादी बेड़ियों से बाहर निकलना चाहिए. बेटियों के इस कदम को ग्राम सिसदेवरी ओर से सलाम किया.