Wednesday, January 28, 2026
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तिल्दा के अल्दा में प्रस्तावित बालाजी स्पंज पावर कंपनी के जनसुनवाई का विरोध

तिल्दा नेवरा -रायपुर जिले के तिल्दा नेवरा तहसील के ग्राम अल्दा में प्रस्तावित बालाजी स्पंज एवं पावर लिमिटेड के लिए पर्यावरण को लेकर आयोजित जनसुनवाई का ग्रामीणों ने एकजुट होकर जमकर विरोध किया। जनसुनवाई में गांव के 300 से भी अधिक लोगों ने पावर प्लांट नहीं खुलने देने की बात कही,इस क्षेत्र में इससे पहले 100 से भी अधिक जनसुनवाईया हो चुकी है लेकिन यह पहली ऐसी  जनसुनवाई थी जहां किसी व्यक्ति ने स्पंज एवं पावर खुलने के पक्ष में नहीं बोला।इतना ही नही अल्दा से लगे आधा दर्जन ग्राम पंचायतो के सरपंचो पचो ने भी ग्रामीणों के समर्थन में आकर प्रस्तावित सयंत्र का विरोध किया

बता दे की तिल्दा के आल्दा में बालाजी स्पंज पावर के द्वारा जमीन खरीदने के बाद 25 अप्रैल को प्रस्तावित बालाजी स्पंज एवं पावर लिमिटेड के लिए पर्यावरण जनसुनवाई रखी गई थी….। हालांकि पावर प्लांट खुलने की  अल्दा गांव के किसी भी ग्रामीण को जानकारी नहीं है ना ही किसी गांव के व्यक्ति ने फैक्ट्री खुलने के लिए जमीन बेची है। बताया  जाता है कि  गाव की जिस जमीन पर स्पंज एवं पावर लगाया जाना प्रस्तावित है उस जमीन को एक ट्रैक्टर कंपनी के द्वारा 10-15 साल पहले गांव के किसानों से खरीदी गई थी. बाद में ट्रैक्टर कंपनी ने बड़े मुनाफा मिलने के कारण जमीन को बालाजी पावर को बेच दी..

इसकी जानकारी जब ग्रामीणों को हुई तो गांव में पावर प्लांट नहीं खुलने को लेकर सभी ग्रामीण एक हो गए। गुरुवार को सुबह से देर रात तक तीन बैठकर ग्रामीणों के बीच हुई। साथ ही गांव से लगे ग्राम पंचायतों के सरपंच और पच विरोध में आ गए, इसी बीच कंपनी मैनेजमेंट ने भाजपा के तथाकथित कुछ नेताओं से संपर्क किया और उन्हीं के कहने पर जल्दबाजी में जनसुनवाई की तारीख मुकर्रर करा दी।बताया  जाता कि ग्राम पंचायत अल्दा के पूर्व सरपंच के द्वारा कार्यकाल समाप्त होने के बाद महिला सचिव से मिलकर कुछ पंचों के हस्ताक्षर करवाने के बाद पंचायत की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है..। लेकिन ग्राम सभा में उसका अनुमोदन नहीं कराया गया है । जिसको लेकर अब ग्रामीण खुलकर पावर प्लांट खुलने का विरोध कर रहे हैं।

आज जब जनसुनवाई शुरू हुई तो ग्रामीणों ने बाहरी नेताओं को पंडाल में घुसने नहीं दिया ..गांव के लोग परिवार के साथ सुबह से ही पंडाल में आ गए थे..विरोध करने आए ग्रामीणों की संख्या इतनी ज्यादा थी की  पंडाल छोटा पड़ गया। साढ़े 10 बजे जनसुनवाई करने पहुंचे पर्यावरण के अधिकारियों ने बताया कि 77 एकड़ जमीन में पावर प्लांट लगाया जाना प्रस्तावित है। अधिकारियों ने जैसे ही जानकारी देना शुरू किया ग्रामीणों ने नारेबाजी शुरू कर दी….। एक दिन पहले  ग्रामीणों ने जनसुनवाई के लिए लगे पंडाल को उखाड़ कर फेंक दिया था और पंडाल के पर्दों में आग लगा दी थी….लिहाजा  आज बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था…। एडिशनल एसपी कीर्तन राठौर, डीएसपी वीरेंद्र चतुर्वेदी सहित आसपास थाने के टीआई और अधिकारियों के साथ पुलिस बल को बुला लिया गया था। कड़ी सुरक्षा के बीच ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी और पावर प्लांट खुलने   का खुलकर विरोध किया।

आपको बता दे 1 घंटे तक लगभग 300 ग्रामीण खिला पुरशो ने अधिकारियों के सामने सयंत्र खुलने का विरोध किया । जिला पंचायत सदस्य, स्वाति वर्मा ने भी ग्रामीणों का समर्थन करते हुए प्रस्तावित पावर प्लांट  का विरोध किया।ग्रामीणों ने जनसुनवाई में शामिल अधिकारियों को आवेदन भी सौपा। विरोध करने वालों में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या अधिक थी। यह पहला मौका है जब जनसुनवाई में ना किसी नेता को बोलने का मौका मिला ना ही अन्य जनप्रतिनिधि को, छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के कुछ नेता पहुंचे थे उन नेताओं ने भी ग्राम वासियों का समर्थन करते हुए संयंत्र का विरोध किया।

बताया जाता है कि जिन दलाल किसम के नेताओं ने जनसुनवाई को सफल बनाने के लिए ठेका लिया था वे नेता ग्रामीणों के रोष को देखते हुए जनसुनवाई से अपनी दूरी बनाऐ रखे , कुछ नेताओं के तो नाम लेकर ग्रामीण काफी उत्तेजित थे।
एक पत्रकार से कुछ ग्रामीण महाराज और दाउ कहकर अप शब्दों का प्रयोग करते हुए बाहर चले जाने की चेतावनी देने लगे। जब उन्हें बताया गया कि यह ना ही दाऊ है ना महाराज  तब जाकर ग्रामीण शांत हुए..।

ग्रामीणों ने कहा कि चाहे हमारी जान चली जाए, लेकिन हम अल्दा की धरा पर पावर प्लांट नहीं लगने देंगे, मरने के लिए तैयार ग्रामीणों ने कहा की जरूरत पड़ी तो हम मारने से भी पीछे नहीं हटेंगे। ग्रामीणों की एकजुटता को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है। हालांकि जनसुनवाई में खलल पैदा करने के लिए दलाल नेताओं ने कुछ बदमाश किस्म के लोगों को बाहर से बुलाया था लेकिन वे भी, पंडाल में प्रवेश नहीं कर सके।

ग्रामीणों का कहना है कि  फैक्ट्री के लगने से खेती किसानी प्रभावित हो रही है. फैक्ट्री के कारण धीरे-धीरे यहां की जमीन की उर्वरक क्षमता खत्म हो रही है . यहां के लोग कृषि पर ही निर्भर हैं. खेती-किसानी से ही उनका घर चलता है. उनके ऊपर बेरोजगारी, भूखमरी और वातावरण दुषित होने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होगी. इसलिए हम स्पंज  पावर  नही खुलने देंगे पहला विरोध गाव के सरपंचने दर्ज कराया

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