कुर्मी बोर्डिंग छात्रावास में श्री भक्तमाल कथा के तीसरा दिन, आचार्य हरिवंश ने कहा ..ईश्वर हमसे कंही दूर नही, बल्कि हमारे आस पास ही है

वीसीएन टाइम्स
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तिल्दा नेवरा –जीवन ज्योति रक्तदान समिति एवं सोमनाथ सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में कुर्मी बोर्डिंग छात्रावास तिल्दा में चल रही पांच दिवसीय संगीतमय श्री भक्तमाल कथा के तीसरे दिन  कथावाचक आचार्य हरिवंश दास महाराज ने कहा कि भगवान अपने भक्तों का निरन्तर ध्यान रखते है,अपने मान का ख्याल न करके अपने अनन्य भक्तों की मान मर्यादा का सदैव ख्याल रखते है,महाराज जी ने कि गुरु माँ के सामान होता है जो हमारा  हर क्षण, ख्याल रखते है, मन की चंचलता को रोकने हेतु गुरु के बताए ध्यान मार्ग में अध्यात्म में चलकर ईश्वर को पाया जा सकता है,ईश्वर हमसे कंही दूर नही बल्कि हमारे आस पास ही है, बस उसे पहचानने की और अपने हृदय को सुंदर व स्वच्छ बनाने की जरूरत है।

आचार्य ने कहा भगवान सत्य संकल्प है जो भगवान से जुड़ गए हैं, वे महापुरुष होकर सत्य संकल्प हो जाते हैंl सत्य संकल्प का मायने बताते हुए कहा की सत्य संकल्प का यह मायने होता है कि उनका एक भी संकल्प असत्य या झूठा नहीं होता । सत्य संकल्प को यह नहीं मानना चाहिए कि हम जो मांगेंगे वह मिल जाएगा. यह दूसरा विषय है..। सत्य संकल्प माने मनुष्य ने जो संकल्प कर लिया है वह सत्य होकर रहेगा गुरु लोगों की शरणागति क्यों ग्रहण की जाती है ,गुरु दीक्षा लेने के पीछे क्या कारण होता है, इससे ज्ञान और नाम मिलेगा शरणागति मिलेगी यह सब सत्य है..  पर एक बड़ी बात यह है कि गुरुदेव सत्य संकल्प है यदि हम उनके संकल्प में आ गए..तभी  गुरुदेव आश्रय प्रदान करेंगे, और जीव को भगवान को अर्पण कर  दास बनाएंगे ,

जैसे हम लोग फूल ठाकुर जी को अर्पण करते हैं, गुरुदेव जीव को अर्पण करते हैं, उसके बाद जिस प्रकार हम अपनी वस्तु की रक्षा करते हैं अपना झोला, अपना पेन, अपना मोबाइल, अपने कपड़े पैसा किसी को नहीं हाथ लगाने नही देते  उसी प्रकार  गुरुदेव जीव को भगवान के अर्पण कर देते हैं। और जब वो वस्तु भगवान की हो जाती है, तब भगवान अपनी वस्तु की रक्षा करते हैं. पराए कि नहीं करते ..जब  मानसिक रूप से जीव अपने को प्रभु को   अर्पण कर देते है  तो ठाकुर जी उनकी बात को नजरअंदाज नहीं करेंगे, वह जिसको अर्पण कर देंगे भगवान उसको स्वीकार करेंगे,  जो अर्पण हुआ है वह यदि अनुकूल आचरण करेगा तो एक ही जगत में बेड़ा पार कर लेगा जल्दी कृपा को प्राप्त कर लेगा और यदि वह प्रतिकूल आचरण करेगा खराब आचरण करेगा तो देरी लगेगी।

 

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