सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग का एक साथ हुआ अभिषेक

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हवन-अनुष्ठान के बाद महादेव घाट में किया गया विसर्जन

रायपुर। सनातन धर्म प्रचार परिषद द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के साथ सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण का लक्ष्य सप्ताह भर में पूरा होने से भक्तों में काफी ज्यादा उत्साह था। शनिवार को सुबह पांच बजे से ही श्रद्धालुजन शिवलिंग अभिषेक पूजन-अनुष्ठान में शामिल होने के लिए लाखेनगर हिंद स्र्पोटिंग मैदान में एकत्रित हो गए थे। पहली बार वे इतनी बड़ी संख्या में शिवलिंग का एक साथ अभिषेक में सहभागी बनना चाह रहे थे।

विशाल पंडाल में चारों तरफ केवल हर-हर महादेव, जय शिव-शंभू,जय भोलेनाथ के जयकारे लग रहे थे। वेदाचार्यों ने पूरी विधि विधान से अभिषेक अनुष्ठान पूरा कराया। हजारों की संख्या में महिला पुरुष सदस्य परिवार के साथ सामूहिक रूप से पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए। अभिषेक के लिए पूरी पूजन सामग्री परिषद के सदस्यों ने उपलब्ध करायी। इन्ही हाथों से सात दिनों में सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग तैयार हुआ था और यह महाअनुष्ठान पूरा होने के बाद देर शाम खारुन नदी महादेव घाट में  विसर्जन करने भक्तजन पैदल ही चल पड़े। रास्ते भर पुष्प वर्षा के साथ स्वागत हुआ। अश्वनी नगर में मिष्ठान व शरबत का वितरण भी किया गया।

संत राजीवनयन व संजीवनयन महाराज ने बताया कि वैसे तो यह एक कठिन लक्ष्य था सात दिनों में सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण, लेकिन महादेव की कृपा से भक्तों ने यह कर दिखाया। कोई रिकार्ड या उपलब्धि बताने के लिए यह आयोजन उन्होने नहीं किया था, भक्तों को भगवान से जोडऩे का एक छोटा सा प्रयास था। रोजाना सुबह छह बजे से लोग पंडाल पहुंच जाते थे और दोपहर तक शिवलिंग निर्माण पश्चात भोजन और फिर कथा श्रवण रात्रि आठ बजे तक मतलब चौदह घंटे नियमित प्रभु की भक्ति के लिए समय देना इससे बड़ी आस्था का उदाहरण भला और क्या हो सकता है। सात दिनों तक चली श्रीमद्भागवत कथा का सार प्रस्तुत करते हुए राजीवनयन जी महाराज ने कहा कि यह तो महिमा है भागवत कथा की कि जितनी भर भी सुनो कम ही है। श्रीकृष्ण जी ने मानव जीवन के लिए कई संदेश दिए हैं। हर अध्याय, हर प्रसंग की अपनी अलग महिमा है। भागवत कथा श्रवण मोक्ष का माध्यम है,गोविंद से मिलाने का रास्ता है,सुनी हुई बातों को आत्मसात कर लिया तो जीवन धन्य हो जायेगा।

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