चित्रसेन साव का जुलूस निकालने पर परिजनों ने पुलिस पर सवाल उठाए, बेटी बोली- केवल न्यायालय को दंड देने का अधिकार

वीसीएन टाइम्स
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रायगढ  -रायगढ जिले के तमनार ब्लॉक के कोल खदान के खिलाफ हुई हिंसा में महिला आरक्षक के साथ हुए मारपीट के मामले के मुख्य आरोपी चित्रसेन साव के जुलुस निकाला गया। जिसके बाद अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। आरोपी के परिजनों ने गलत ठहराया है। घटना के मुख्य आरोपी चित्रसेन साव की बेटी ने मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग से करने की बात कही है। परिजनों ने मामले को कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद भी कही है। आरोपी चित्रसेन की बेटी पूनम साव ने घटनाक्रम को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है।

परिजनों के मुताबिक घटना में शामिल चित्रसेन साव को रायगढ़ में पुलिस अधिकारियों द्वारा अर्धनग्न अवस्था में चूड़ी, बिंदी, लिपस्टिक लगाकर शहर में घुमाया था जो कानूनन कतई सही नहीं है। पीड़ित के परिजनों ने मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग है। आरोपी की बेटी का आरोप है कि इस तरह की दंडात्मक कार्रवाई न केवल अमानवीय है, बल्कि भारतीय संविधान और मानवाधिकारों के भी विरुद्ध है। किसी भी आरोपी को दंड देने का अधिकार केवल न्यायालय को है, न कि पुलिस अधिकारियों को। इस तरह सार्वजनिक रूप से अपमानित करना कानूनन गलत है और इससे आरोपी की मानसिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

उसका यह भी कहना है कि यदि भविष्य में चित्रसेन साव का मानसिक संतुलन बिगड़ता है या किसी भी तरह की कोई घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित पुलिस अधिकारियों की होगी। परिजनों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए अपने अधिवक्ता के माध्यम से मानव अधिकार आयोग रायपुर और रायगढ़ कलेक्टर को लिखित आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई है। परिजनों ने दोषी पुलिस अधिकारियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि पुलिस कानून अपने हाथ में ले।चित्रसेन साव ने यदि कोई अपराध किया है, तो उसकी सजा न्यायालय तय करेगा, लेकिन पुलिस द्वारा दी गई सामाजिक सजा पूरी तरह अनुचित है और इस पर विधिसम्मत कार्रवाई होनी चाहिए। वे इस मामले में कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।

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