बस्तर: पिछले दिनों छत्तीसगढ़ सरकार और पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली थी। उत्तर बस्तर में सक्रीय करीब 208 नक्सलियों ने, माओवादी नेता रूपेश के साथ मिलकर अपने हथियार पुलिस को सौंपे थे। इस आत्मसमर्पण के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री, दोनों उप मुख्यमंत्री और डीजीपी समेत प्रशासन व पुलिस के आला अधिकारी मौजूद थे। सभी को इस दौरान संविधान की प्रति और समाज प्रमुखों के द्वारा गुलाब का फूल भेंट किया गया। नक्सल इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण माना गया था। जबकि इस सरेंडर से ठीक पहले माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो के सदस्य और सीसी मेंबर भूपति उर्फ़ सोनू दादा के साथ करीब 60 माओवादियों ने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में सीएम देवेंद्र फडणवीस के सामने हथियार डाले थे।
इस बीच सूत्रों का दावा उत्तर बस्तर से 50 से अधिक नक्सली जल्दी ही आत्मसमर्पण कर सकते हैं , इसमें शामिल 40 लाख का ईनामी नक्सली रामधेर, महला कैंप में समर्पण करने की चर्चा है हालांकि अभी अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बता दें कि देश के कई राज्यों, खासकर छत्तीसगढ़ के लिए नक्सलवाद हमेशा से चिंता और बहस का मुद्दा रहा है। लेकिन अब नक्सलवाद के अंत की तारीख को लेकर भी बहस बढ़ती जा रही है। सरकार बार-बार दोहरा रही है कि 2026 के मार्च तक नक्सलियों का सफाया तय है तो विपक्ष के नेता रह-रह कर दावे को खारिज करने नए-नए तर्क सामने रख रहे हैं। अब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है, नक्सवाद के खात्म की ‘डेडलाइन कोई तय नहीं कर सकता’…क्यों, आपको बताते हैं।
दिल्ली से लेकर रायपुर तक छत्तीसगढ़ की डबल इंजन सरकार इन दिनों नक्सलवाद के खात्मे का दावा कर रही है। सरकार को भरोसा है कि 31 मार्च 2026 से पहले बस्तर और छत्तीसगढ़ पूरी तरह नक्सलमुक्त हो जाएगा। हाल के दिनों में जिस तरह से बड़े और इनामी कमांडर और नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है उसके बाद बीजेपी नेता यही कह रहे हैं। डेडलाइन से पहले ही नक्सलवाद का खात्मा हो जाएगा।
डिप्टी CM का दावा, ‘बस्तर जल्द नक्सलमुक्त होगा’
हालांकि पूर्व सीएम और दिग्गज कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ऐसा नहीं मानते। उनके मुताबिक नक्सलियों की रणनीति है। वो कुछ दिन शांत रहेंगे, फिर बड़ा हमला करेंगे। पूर्व सीएम ने सरकार के संकल्प पर सवाल उठाया तो सत्तापक्ष की तरफ से जवाब कैसे नहीं आता? डिप्टी सीेएम अरुण साव ने कहा कि बस्तर जल्द नक्सलमुक्त होगा। थोड़ा इंतजार करे।