सिरपुर;अंतरराष्ट्रीय पुरातात्विक स्थल एवं प्राचीन दक्षिण कोसल की वैभव सहली राजधानी रहे सिरपुर के विकास तथा इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की कवायद के तहत केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत एकदिवसीय कार्यक्रम पर सिरपुर पहुंचे। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, राज्य के पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल तथा महासमुंद लोकसभा सांसद रूपकुमारी चौधरी भी उनके साथ मौजूद रहे।
गौरतलब है कि वर्ष 1953 से 1956 के बीच सागर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के प्रोफेसर एम. जी. दीक्षित के नेतृत्व में सिरपुर में उत्खनन कार्य किया गया था। इसके बाद वर्ष 1999 से 2011 के बीच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के तत्कालीन महानिदेशक जगतपति जोशी एवं पुरातत्वविद् अरुण शर्मा के नेतृत्व में हुए उत्खनन में सिरपुर में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के कुल 34 पुरातात्विक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल सामने आए। महानदी के तट पर स्थित सिरपुर में अब तक 34 पुरातात्विक स्थल मिलने के बावजूद कई स्थानों पर उत्खनन कार्य अभी शेष है। बौद्ध, हिंदू और जैन धर्म से जुड़े महत्वपूर्ण पुरातात्विक प्रमाणों वाले इस क्षेत्र को विकसित करने और विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयास लगभग दो दशक पहले शुरू हुए थे, जो अब तक जारी हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद सिरपुर अभी तक विश्व धरोहर की सूची में शामिल नहीं हो सका है।
उल्लेखनीय है कि महासमुंद लोकसभा सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी ने इस मुद्दे को संसद में भी उठाया था। इसी कड़ी में सिरपुर पहुंचे केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि सिरपुर की समृद्ध पुरा-संपदा और विकास यात्रा को समझने तथा इसे एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से वे यहां आए हैं।सिरपुर के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलो के भ्रमण एवं अवलोकन के बाद केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि पिछले 11 सालो से भारत के धरोहरो को विश्व धरोहर की सूची मे शामिल कराया जा है ।सिरपुर को भी विश्व धरोहर की सूची मे शामिल कराने के प्रयास जारी है ।

