. हिन्दू नव वर्ष की शुरुवात भी गुरवार से ..
तिल्दा नेवरा-नववर्ष 2026 की शुरुआत इस बार गुरुवार हुई है और गुरुवार को ही यह साल खत्म होगा। यह संयोग अपने आप में खास माना जा रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से 1 जनवरी का गुरुवार होना शुभ संकेतों से जुड़ा माना जाता है।ये ज्ञान-धर्म-आर्थिक स्थिरता का सूचक है .
सनातनी परंपरा में गुरुवार का दिन शुभ और श्रेष्ठ माना गया है। इसलिए अच्छे कामों की शुरुआत गुरुवार से करने की परंपरा है। संयोग से इस साल एक जनवरी 2026 को गुरुवार है। ऐसा दस साल बाद यानी 2015 के बाद हो रहा है। इसे ज्योतिष और पंडित विशेष शुभ मान रहे हैं।साल का पहले दिन का यह संयोग और भी अनूठा है क्यों कि वर्ष 2026 का अंतिम दिन 31 दिसंबर भी गुरुवार को ही पड़ेगा
इतना नही हिंदू नववर्ष का शुभारंभ भी गुरुवार19 मार्च को गुड़ी पड़वा के साथ होगा । पिछले 95 वर्षों में, 1 जनवरी पर गुरुवार को नया साल शुरू होने का संयोग केवल 12 बार ही बना है। अब 2026 में यह आंकड़ा 13 वीं बार बना है । ज्योतिषाचार्य पंडित संतोष शर्मा ने बताया कि गुरुवार को हिंदू ही नहीं, बल्कि जैन, बौद्ध, ईसाई, सिख धर्मोंऔर मुस्लिम समाज में भी आस्था, ज्ञान, दान और शुभ कार्यों का प्रतीक माना गया है। ज्योतिषियों का मत है कि गुरुवार को नए साल की शुरुआत होने का अर्थ है कि अंकों के गणित से भले सूर्य का वर्ष हो, लेकिन इस पर गुरु का अधिपत्य भी रहेगा और धर्म व अध्यात्म के क्षेत्र में अनेक शोधपूर्ण कार्य होते दिखाई देंगे। वजह यह है कि बृहस्पति देवताओं के गुरु, ज्ञान, धर्म, नीति और विस्तार के कारक माने गए हैं। बृहस्पति को देवगुरु और धर्म का संरक्षक माना गया है।
पंडित आचर्य पवन शास्त्री रीवा ने बताया की सनातनी लोग इस दिन विष्णु, बृहस्पति और सत्यनारायण भगवान की पूजा करते हैं। विवाह, नामकरण, यज्ञ, व्रत और दान जैसे कार्य इस दिन करना उत्तम माना जाता है। पीले वस्त्र, चने की दाल, हल्दी, गुड़ और पीले फूल का दान भी इस दिन विशेष पुण्यकारी माना जाता है। अनेक लोग गुरुवार को व्रत रखते हैं। देवताओं को नीति, धर्म और ज्ञान का उपदेश देने वाले गुरु बृहस्पति ही माने जाते हैं। बौद्धों में भी गुरुवार को ध्यान, करुणा और प्रज्ञा (ज्ञान) का प्रतीक माना जाता है। जैन परंपरा में यह दिन गुरु वंदना, ज्ञान, स्वाध्याय और संयम से जुड़ा माना गया है।इसी कारण गुरुवार से शुरू हुए नए साल को धर्म आध्यात्मिक और शुद्ध पूर्ण गतिविधियों के लिए विशेष माना जा रहा है. शास्त्री ने कहा साल की पहली ही तिथि पर गुरु प्रदोष व्रत का संयोग भी बना है ..भगवान विष्णु त्रिलोकीनाथ हैं-भूः, भुवः और स्वः-तीनों लोकों के स्वामी। वे समस्त सृष्टि के पालन, रक्षण एवं पोषणकर्ता हैं। जिनकी कृपा से धर्म की प्रतिष्ठा, जीवन की मर्यादा और आत्मा की शुद्धि संभव होती है। इस साल प्रभु की विशेष कृपा बनी रहेगी

