सराफा बाजार की जुमलेबाजी समझना हो गया है जरूरी…

वीसीएन टाइम्स
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रायपुर। सराफा बाजार में इन दिनों लगातार तेजी फिर कुछ ब्रेक फिर उछाल खबरों में बनी हुई है। चूंकि अक्षय तृतीया तक बाजार में वैवाहिक खरीदी हर साल अच्छी रहती है यह व्यापारी भी जानते हैं। लेकिन इस असमान व रिकार्ड तोड़ बढ़त का कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार को बताया जा रहा है। हां,ये भी सच है कि शेयर व सराफा को अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित करते हैं लेकिन कारोबार तो भारत सहित पूरे विश्व में होना है,स्थानीय खरीदी भी तो कहीं न कहीं असर करेगा। दरअसल हकीकत ये हैं कि जब कीमत ज्यादा बढ़ गई तो ग्राहकों ने लेवाली अटका दी और दो दिन में सोना 1550 व चांदी 2300 रुपए घट क्या गई फिर प्रचार शुरु हो गया,बाजार धड़ाम..। अरे 74,250 रुपए प्रति दस ग्राम का सोना लेना क्या सभी के लिए आसान हंै क्या? लोग अपनी जरूरत में कटौती भी करने लगे क्योकि वास्तविकता ये है कि ग्राहक उतनी ही खरीदी करता है जितना कि जेब में पैसा होता है। दो दिन नहीं पहुंचे ग्राहक,तो कीमत घटा दिए यदि चार दिन नहीं जायेंगे तो यह और नीचे चले जायेगा।

ग्राहक इस बात को लेकर भी खासे नाराज हैं कि हालमार्क का हल्ला पिछलेे दिनों अनिवार्य होने पर इसलिए मचाया गया कि अब ग्राहकों को वापसी पर सौ टका रिफ्लेस मिलेगा लेकिन मिल कहां रहा है। 50 में खरीदा दुकान गए तो 45 बता दिए। इसके पीछे का कारण व्यापारी आपको गिना देंगे। सोना पहले भी खरा मिलता था और कारोबार भी खरा था,केवल विश्वास पर काम होता था। फिर ग्राहक जुमलेबाजी में ही तो फंसा है न उसे क्या फायदा हो रहा है बाजार के वर्तमान सिस्टम व कीमत का ? खुद नेशनल लेवल का बुलियन एसोसिएशन स्वीकार रहा है कि इस असमान घटबढ का बाजार पर असर हो रहा है। सीधी सच्ची बात ये है कि जब तक वैवाहिक खरीदी की मांग है बाजार में सोना 70 व चांदी 80 के पार ही रहेगा। फिर बारिश आते ही बाजार वैसे ही डाउन हो जायेगा। इसलिए आज के प्रायोजित बाजार रूख को समझने की भी जरूरत है जिसमें यहां से वहां तक चैनल सक्रिय है।

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