रुक्मणी विवाह के प्रसंग पर पंडाल में श्रद्धालुओं ने बरसाये फूल

वीसीएन टाइम्स
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  नेवरा महेश्वरी भवन में अखिल भारतीय अग्रवाल महिला समाज नेवरा,सीताराम अग्रवाल, नवल किशोर अग्रवाल,के संयुक्तत त्वाधान में आयोजित  भागवत कथा के पांचवे दिन मथुरा से पधारे कथावाचक रमाकांत शर्मा ने कहा अभिभावक बच्चों को बचपन से ही संस्कार दें, ताकि वे उम्र भर संस्कारवान बनकर समाज की सेवा के साथ बड़ो का आदर कर सके उन्होंने कहा कि बच्चों की पहली गुरु मां होती हैं

श्रद्धालुओं से खचाखच भरे भवन में वाणी की अमृत वर्षा का रसपान कराते हुए कथा वाचक ने जरासंघ वध ,राजा मुचकुंद का उद्धार.कि  कथा का श्रवण कराया। महराज ने बताया कि श्रीकृष्ण ने घास की एक डंडी की सहायता से भीम को संकेत किया कि इस बार वह उसके टुकड़े करके दोनों टुकड़े अलग-अलग दिशा में फेंके तब भीम ने वैसा ही किया और इस प्रकार जरासघ का वध हुआ.  बंदी गृह में बंद सभी 86 राजाओं को मुक्त किया और श्री कृष्ण ने जरासंघ के पुत्र सहदेव को राजा बनाया|श्री शर्मा ने राजा मुचकुंद की कथा काप्रसंग बताते हुए बड़े ही सुंदर ढंग से श्रोताओं को कथा का  रसपान कराया”| कथा वाचक ने श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग सुनाया।

श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह को एकाग्रता से सुना। श्रीकृष्ण-रुक्मणि का वेश धारण कर जब  बाजे गाजे के साथ कथा स्थल पहुचे  श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। उसके बाद भजनों पर श्रद्धालु नाचते विवाह कि एक दुसरे को बधाई देते रहे ..इस मौके कथा स्थल के बाहर प्रांगण में जोरदार आतिशबाजी भी की गई.

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