दुर्ग -जिले के धमधा थाना क्षेत्र में संचालित श्रेया अस्पताल के प्रबंधक और डॉक्टर के ऊपर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। श्रेया अस्पताल में ऑपरेशन के बाद 55 साल की महिला की तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल प्रबंधन ने दो कर्मचारी के साथ उसे एंबुलेंस से जुनवानी के शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज भेज दिया था।
इसकी जानकारी परिजनों को नहीं दी गई थी। भिलाई के शंकराचार्य अस्पताल में कैजुअल्टी में डॉक्टरों ने महिला की मौत की जानकारी दी थी। इसके बाद श्रेया अस्पताल के दोनों कर्मचारी भाग गए। शंकराचार्य अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी।
शव की पहचान नहीं होने पर उसे लावारिस हालत में मॉर्च्युरी में रख दिया गया था। इसके बाद परिजनों को महिला का शव मिला था। इस मामले में परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने अस्पताल के डॉक्टर और प्रबंधक पर BNS की धारा 106(1) व 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। एफआईआर के अनुसार ग्राम अछोली निवासी चिरंज वर्मा ने पुलिस को बताया कि उनकी माता पदमा बाई वर्मा (पति बिसाहू वर्मा) 10 अक्टूबर की रात घर के आंगन में गिर गई थीं, जिससे उन्हें चलने में असमर्थता और तेज दर्द हो रहा था।
11 अक्टूबर को शाम करीब 4 बजे उन्हें श्रेया हॉस्पिटल एंड डायग्नोस्टिक सेंटर धमधा में भर्ती कराया गया। अस्पताल में डॉक्टर ने पैर टूटने की बात कहकर ऑपरेशन की सलाह दी, जिस पर परिजनों की सहमति से 12 अक्टूबर को ऑपरेशन किया गया।परिजनों का आरोप है कि, ऑपरेशन के बाद भी महिला की हालत में सुधार नहीं हुआ। खाना न खाने पर जब डॉक्टर से सवाल किया गया तो इसे ऑपरेशन के बाद का सामान्य दर्द बताया गया। 14 अक्टूबर को दोपहर करीब 3:30 बजे अचानक पदमा बाई की सांस तेज चलने लगी।
सूचना देने पर अस्पताल के दो डॉक्टर आए और इलाज करने लगे। कुछ देर बाद महिला को व्हीलचेयर पर कमरे से बाहर लाकर परिजनों से कहा गया कि हालत गंभीर है और दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ेगा।
मौत होने के बाद भी कर दिया रेफर
परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने मां पद्मा बाई वर्मा को देखा तो उसकी आंखें और मुंह खुले थे और सांस नहीं चल रही थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी माता की मौत हो चुकी है और वे उसे कहीं और नहीं ले जाना चाहते। इसके बावजूद श्रेया हॉस्पिटल प्रबंधन ने परिजनों की सहमति के बिना डॉक्टर के और अधूरे उपकरणों वाली एंबुलेंस से महिला को शंकराचार्य हॉस्पिटल जुनवानी भिलाई भेज दिया।
लावारिस स्थिति में मॉर्च्युरी में रखा था शव
करीब एक घंटे बाद परिजनों को जानकारी दी गई कि महिला को शंकराचार्य हॉस्पिटल ले जाया गया है, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आरोप है कि वहां महिला को अज्ञात मृतिका के रूप में दर्ज कर लिया गया, जिससे परिजनों को शव पाने के लिए पुलिस कार्रवाई और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
शिकायत के बाद हुई जांच, ढ़ाई महीने के बाद अपराध दर्ज
इस मामले की शिकायत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दुर्ग को भी की गई थी। जांच में डॉक्टर अभिषेक पाण्डेय और अस्पताल प्रबंधक मनीष राजपूत की लापरवाही सामने आई। इसके आधार पर ढ़ाई महीने लंबी जांच के बाद धमधा पुलिस ने दोनों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर लिया है।
पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत विवेचना की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

