Wednesday, January 14, 2026
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तिल्दा में सिंधी भाषा डिप्लोमा-सर्टिफिकेट परीक्षा हुई सम्पन्न; 230 विद्यार्थी ने दी परीक्षा 

भाषा के संरक्षण- शैक्षणिक पहचान को मिलेगा बढ़ावा

तिल्दा नेवरा-सिंधी भाषा विकास परिषद के तत्वाधान एवं पूज्य सदाणी दरबार के नवम गद्दीनसीन संत युधिष्ठिर लाल केके सयुक्त तत्वाधान में  सिंधी भाषा डिप्लोमा व एडवांस डिप्लोमा परीक्षा सर्टिफिकेट की परीक्षा तिल्दा नेवरा शारदा शिशु मंदिर में सम्पूर्ण परीक्षा परिषद के अधिकारी बेंगलुरु के कन्हेया लाल खटवानी,सदाणी दरबार के मुरली बत्रा,ताराचंद मोह्नानी रोशन आहूजा के सुपरविजन में सम्पन्न हुई। इस मौके पर तिल्दा सिधी समाज के मुखी छमनलाल खूबचंदानी,शारदा शिशु मन्दिर के प्रमुख परमाँनद बालचंदानी खेमचंद वीरानी मौजूद रहे।

केंद्र पर कुल 220 बच्चों और 10 बुजुर्गो ने देवनागरी की परीक्षा दी। परीक्षा संयोजक कन्हेया लाल खटवानी, ने बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा परीक्षा के माध्यम से सिंधी भाषा, संस्कृति व रीति रिवाजों के साथ लिपि का ज्ञान करवा भारतीय भाषाओं को समृद्ध बनाने का यह प्रयास है। उन्होंने  सिंधी भाषा के विविध रूपों के साथ नई शिक्षा नीति के भाषाई फार्मूले पर चर्चा कर अधिकाधिक भाषाओं के अनुवाद कर सरकारी योजनाओं की जानकारियां दी।उन्होंने बताया सिंधी भाषा सर्टिफिकेट व एडवांस डिप्लोमा कक्षाओं में शिक्षण कार्य करवाया गया।सर्टिफिकेट ,डिप्लोमा,,एडवांस डिप्लोमा के लिए 330 विद्यार्थियों ने परीक्षा में शामिल होने आवेदन दिया था ,लेकिन परीक्षा में कुल 230 ने परीक्षा दी।

टीचर संचिता बत्रा ने बताया की परीक्षा शांतिपूर्ण और अनुशासनात्मक वातावरण में संपन्न हुई। परीक्षा संचालन में परिषद द्वारा निर्धारित मानकों और दिशा निर्देशों का पालन किया गया।उन्होंने बताया परीक्षा में मोहन जो दड़ो, सिंधु मुहजी अम्मा. सिंधी समाज के महापुरुष संत और इष्ट देवता झूलेलाल भगवान की जीवनी आदि विषयों का प्रश्नों में उल्लेख था. इसके अलावा अन्य कई विषय शामिल किए गए थे. टीचर नेहा भोजवानी  ने बताया कि परीक्षा का परिणाम 2 महीने के बाद आएगा इसमें मेरी लिस्ट में आने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार दिया जाएगा.. वर्षा बत्रा जमुना भोजवानी ने बताया कि पिछले दो परीक्षाओं में तिल्दा के परीक्षार्थियों के नाम मेरिट लिस्ट में आते रहे थे..

सिंधी समाज के अध्यक्ष छमनलाल खूबचंदानी ने कहा कि सिंधी भाषा भारतीय भाषाई विरासत का हिस्सा है और इस प्रकार की परीक्षाएं भाषा को शैक्षणिक पहचान देने में मददगार हैं। इससे नई पीढ़ी में मातृभाषा सीखने की रुचि विकसित होती है।उन्होंने कहा कि परिषद द्वारा संचालित शैक्षणिक व प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर सिंधी भाषा के प्रचार-प्रसार को आधार दे रहे हैं। आगे भाषा-विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का दायरा बढ़ाने की योजना है, जिससे भाषा संरक्षण के प्रयासों को गति मिलेगी। परीक्षा को सुचारू रूप से संपन्न कराने में दिव्या भोजवानी.सोना ना भोजवानी, राजकुमार शिवदासानी, वीणा चदानी, ज्योति भोजवानीमनोज भोजवानी  का विशेष योगदान रहा।

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